Live : जालोर में राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में चार जिलों के किसानों का महापड़ाव शुरू

अर्थन्यूज नेटवर्क. जालोर

शहर में मंगलवार को जिला कलक्ट्री के समक्ष जालोर, सिरोही, बाड़मेर और पाली जिले के किसानों का अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू हो गया है। जिसमें चारों जिलों के किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। किसानों ने कलक्ट्री रोड पर ही अपना डेरा डाला।

किसानों के महापड़ाव के फोटो देखें…

भारतीय किसान संघ की ओर से माही बांध का पानी सिरोही, पाली, जालोर व बाड़मेर में उपलब्ध करवाने को लेकर मंगलवार को अपना अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू किया। चारों जिलों के किसान सोमवार शाम से ही जालोर पहुंचने शुरू हो गए थे, यह सिलसिला मंगलवार तक जारी रहा। सभी किसान अलग-अलग मण्डल बनाकर आवश्यक सामग्री के साथ ट्रैक्टरों से जालोर पहुंचे।

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सुबह करीब 10 बजे किसान एकत्र होकर कलक्ट्री सामने टैंट लगाकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान कुछ किसान रोटियां बनाने, चाय बनाने और पानी पिलाने के काम में लग गए। महापड़ाव शुरू करते ही भगवान बलराम के जैकारे गूंजने शुरू हो गए। इस दौरान किसान नेताओं ने महापड़ाव को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कई चुनावी घोषणाएं की थी, जिसमें से एक भी घोषणा अभी तक पूरी नहीं हुई है। चारों जिलों के किसानों को माही बांध का पानी उपलब्ध करवाने को लेकर कार्य शुरू करवाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक सीएम ने इस बारे में बात तक नहीं की है। राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते सभी किसान परेशान है, उसके बावजूद बिजली की दरें और अधिक बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार हमारी ओर ध्यान नहीं देगी हम यह महापड़ाव डाले रहेंगे।

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साथ में लाए कढ़ाए और लकडिय़ां

महापड़ाव के दौरान किसी भी चीज की कमी नहीं आए इसलिए किसान अपने साथ आवश्यक सामान लेकर आए। रोटियां बनाने के लिए गेहूं और आटा, पानी के लिए पानी के टैंकर और टंकिया, चाय बनाने के लिए गैस, दूध, शक्कर साथ लाए। वहीं सामूहिक भोजन बनाने के लिए टै्रक्टरों में लकडिय़ां तथा बड़े-बड़े कड़ाए भी साथ में लाए।

सड़कों पर बनने लगी रोटियां

जालोर में मंगलवार को कलक्ट्री के सामने एक तरफ चारों जिलों के किसानों का धरना शुरू हुआ तो दूसरी तरफ कुछ किसानों ने चाय और रोटियां बनानी शुरू कर दी। सड़क किनारे ही ईंटें लगाकर चूल्हा शुरू कर दिया। कुछ आटा गूंद रहे थे तो कुछ रोटियां सेक रहे थे। धरने पर बैठे किसानों के लिए रोटियां बनाते इनका जोश देखने लायक था।

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