एईएन का दावा पार्षद के मार्फत सभापति को दी फाइलें, लेकिन पार्षद मुकरा

जालोर @ अर्थ न्यूज नेटवर्क


पत्रकारों को भूखंड आवंटन की 10 मूल पत्रावलियां व आबादी भूमि से सम्बंधित इजाजत तामिर की दो पत्रावलियां गुम हुए महीनों गुजर गए, लेकिन नगर परिषद प्रशासन अब तक इन पत्रावलियां का पता नहीं लगा पाया है। हाल यह है कि कुछ ही दिन पहले सहायक अभियंता महेश राजपुरोहित ने आयुक्त को पेश किए लिखित जवाब में यह पत्रावलियां एक पार्षद के जरिए सभापति को भेजने की बात कही थी, लेकिन इसके साथ ही अब पार्षद ने इन दावों को बेबुनियाद बताते हुए स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक व मंत्री से जांच व कार्यवाही की मांग की है।
गौरतलब है कि गत 11 दिसम्बर को एक दैनिक समाचार पत्र में समाचार प्रकाशित हुआ था। जिसके अनुसार आयुक्त त्रिकमदान की ओर से सहायक अभियंता को नोटिस जारी करने के बाद उन्होंने लिखित जवाब पेश किया है। जिसमें सहायक अभियंता महेश राजपुरोहित ने बताया है कि उनकी सभापति से फोन से बात हुई थी, इसके बाद उनके कहे अनुसार पत्रकारों को भूखंड आवंटन की 10 मूल पत्रावलियां वार्ड 17 के पार्षद ओमप्रकाश के जरिए सभापति को दी थी। लेकिन शुक्रवार को इस मामले ने नया मोड़ लिया, जब पार्षद ओमप्रकाश माली ने मुख्यमंत्री, स्वायत्त शासन मंत्री, विभाग के निदेशक को ज्ञापन भेजकर इन बातों को बेबुनियाद बताया है। ज्ञापन में बताया कि सहायक अभियंता का यह कथन बेबुनियाद है। परिषद की ओर से अब तक पत्रावलियां नहीं मिलने पर सम्बंधित के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है। तो दूसरी तरफ इस सम्बंध में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की झूठी बात कहकर जनता व पार्षदों को भ्रमित किया जा रहा है। जबकि पुलिस के अनुसार अब तक ऐसी कोई एफआईआर ही दर्ज नहीं हुई है।

कार्यवाही की मांग

पार्षद ओमप्रकाश माली ने ज्ञापन में बताया कि सहायक अभियंता महेश राजपुरोहित ने उन पर झूठा आरोप लगाकर उनकी छवि पर दाग लगाया है। उनकी मानहानि होने से उन्हें मानसिक क्षति पहुंची है। लिहाजा, उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाए।

 

भ्रष्टाचार का गढ़ बन गई परिषद

जालोर नगर परिषद संभाग के उन निकायों में शुमार है जहां भ्रष्टाचार चरम पर है। इसकी सबसे बड़ी वजह किसी हद तक पार्षदों का बेबस रवैया भी है। नगर परिषद सभापति भंवरलाल माली ने जहां सभापति की कुर्सी पर काबिज होते ही फर्जी पट्टों व रिश्वत के जरिए धन की उगाही शुरू कर दी। हालांकि परिषद के कई पार्षदों की छवि बेदाग रही है, लेकिन पक्ष-विपक्ष के कुछ पार्षद उन्हें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर सहयोग करते रहे। इसकी वजह उनके निजी स्वार्थ रहे हैं। वहीं पार्टी दबाव में पार्टी के कई साफ छवि के पार्षद भी बेबसी से इस पूरे खेल को देखते रहे। यही बेबसी भंवरलाल के लिए संजीवनी बन गई। हालांकि एसीबी की कार्यवाही के साथ ही पाप का यह घड़ा फूट गया। लेकिन इसके बाद एक अयोग्य सहायक अभियंता को आयुक्त की कमान सौंप कर पार्षदों ने फिर से पाप की लंका की नींव रखना शुरू किया। अपने कार्यकाल में कार्यवाहक आयुक्त रहे महेश राजपुरोहित ने नाम मात्र के रुपयों के भी परिषद की भूमि पर अनधिकृत रूप से पट्टे जारी करने का खेल खेला। इस दौरान वे विलासितापूर्ण जीवन जीते रहे। लेकिन इस दौरान पक्ष-विपक्ष के पार्षदों के साथ ही जनप्रतिनिधि भी इस पर खामोशी साधे रहे। आखिरकार एसीबी में अनधिकृत रूप से जारी किए गए पट्टों की जांच शुरू होने के बाद इस पर अंकुश लगा, लेकिन इसके साथ ही विकास पर भी काला ग्रहण लग गया।

नए आयुक्त से लगी उम्मीदें, अब टूटने लगी

इस बीच, त्रिकमदान ने नगर परिषद में आयुक्त के तौर पर कार्यभार ग्रहण किया। इस दौरान पक्ष-विषक्ष के पार्षदों के साथ ही जनता को भी शहर के विकास की उम्मीद जगी थी, लेकिन आयुक्त की सुस्त कार्य प्रणाली के साथ ही अब ये उम्मीदें भी टूटने लगी है।

 

आखिर पार्षदों को बदलना होगा ढर्रा

यह कोई पहला मामला नहीं है जब नगर परिषद से पत्रावलियां गायब हुई है। इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण पत्रावलियां गायब होने के आरोप प्रत्यारोप लग चुके हैं। ऐसे में इस स्थिति से निपटने के लिए पार्षदों को पक्ष-विपक्ष का वाद भूलाकर ढर्रा बदलना होगा। गुुरुवार को सार्वजनिक निर्माण मंत्री युनूस खान के जालोर दौरे के दौरान मंत्री के साथ ही जालोर सांसद ने भी भ्रष्टाचार करने के वालों खिलाफ कार्यवाही में साथ रहने की बात कही थी। ऐसे में होना तो यह चाहिए कि सांसद के साथ ही भाजपा के कुछ विधायकों को साथ लेकर पार्षद भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच करवाकर सख्त कार्यवाही के लिए कदम उठाए।

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