राजस्थान के दलित जनप्रतिनिधियों को चेतावनी, फूंके जाएंगे पुतले

जालोर @ अर्थ न्यूज नेटवर्क


निकटवर्ती मांडवला गांव में दलित बेटी की घोड़ी पर बंदोली निकालने के बाद कुछ समाजकंटकों की ओर से दुल्हन के पिता को सोशल मीडिया पर धमकाने के मामले में प्रदेश के कई जिलों में तीखा विरोध हुआ। प्रदेश के विभिन्न जिलों में दलित संगठनों की ओर से जिला कलक्टर के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई। लेकिन सामाजिक एकता के बावजूद अधिकांश दलित जनप्रतिनिधियों की ओर से इस मामले में उदासीनता बरती गई। इसको लेकर दलित संगठनों ने ऐसे जनप्रतिनिधियों का सामाजिक स्तर पर विरोध जताने के साथ ही पुतले फूंकने की चेतावनी तक दे डाली है।
सामाजिक कार्यकर्ता बृजेश बाजक ने बताया कि जिले में दलित उत्पीडऩ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद कुछ जनप्रतिनिधियों को छोड़कर अधिकांश विरोध दर्ज कराने से भी कतरा रहे हैं। उन्होंने प्रदेशभर के दलित जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि या तो वे समाज पर बढ़ रहे उत्पीडऩ मामलों को लेकर सरकार के समक्ष अपना विरोध दायर करें। अन्यथा 25 दिसम्बर के बाद ऐसे तमाम जनप्रतिनिधियों के पुतले फूंके जाएंगे। उन्होंने कहा कि समाज का प्रतिनिधित्व करने वालों का दायित्व होता है कि वे उनकी भावनाओं के अनुरूप कार्य करें।

यह है मामला

मांडवला निवासी भगवानाराम मेघवाल की बेटी की गत दिनों शादी थी। इस दौरान परिजनों की ओर से घोड़ी पर बंदोली निकाली गई थी। यह बात कुछ समाजकंटकों को इतनी बुरी लगी कि उन्होंने उन्होंने भगवानाराम के परिजनों को सोशल मीडिया पर धमकियां देने के साथ ही जातिसूचक व अपमानजनक टिप्पणियां शुरू कर दी। इस सम्बंध में पीडि़त परिवार की ओर से पुलिस व प्रशासन में शिकायत के बावजूद जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो मेघवाल समाज में आक्रोश बढऩे लग गया। इसके बाद प्रदेश के कई हिस्सों से गृहमंत्री व मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे गए।

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