किरोड़ी-पंकज की जोड़ी ने आहोर और जालोर मेें बिगाड़े राजनीतिक समीकरण, मुश्किलें खड़ी हो गई इनके लिए, जानिए

 

अर्थ न्यूज नेटवर्क, जालोर

लालसेट विधायक किरोड़ीलाल मीणा व मीन सेना के प्रदेशाध्यक्ष पंकज मीणा की ओर से गत दिनों आहोर में आयोजित महारैली ने जालोर व आहोर के राजनीतिक समीकरण को काफी प्रभावित किया है। यह महारैली दलितों के खिलाफ हो रहे अत्याचार के विरोध में थी। हालांकि इसका राजनीतिक एंगल भी देखा जा सकता है। कुछ भी हो, इस रैली में जुटी दलित समाज के लोगों की भीड़ तथा किरोड़ी के भाषण ने कांग्रेस व भाजपा पार्टी के जालोर व आहोर दोनों विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक हलचल खड़ी कर दी है।

आहोर में निर्दलीय इस बार बाजी मार सकता है

किरोड़ी व पंकज मीणा की रैली के बाद यदि पंकज मीणा आगामी विधानसभा चुनाव में खड़े होते हैं तो दलितों के वोट यानि कांग्रेस का वोट बैंक पूरी तरह हासिल कर लेंगे। इधर, कांग्रेस का वोट बैंक टूटता है, तो भाजपा को फायदा मिलेगा, लेकिन मौजूदा विधायक शंकरसिंह राजपुरोहित के खिलाफ राजपूत समाज का विरोध उनके सामान्य व ओबीसी वोट को हासिल नहीं करने देगा। इधर, इस बार यदि कोई बेदाग छवि का निर्दलीय व्यक्ति मैदान में आता है तो राजपूत समाज समेत अन्य ओबीसी वर्ग जो भाजपा के इस बार के कार्यकाल से खफा है उनके साथ जुड़ सकते हैं।

किरोड़ी के बयान से जालोर विधायक के खिलाफ भी तैयार हुआ माहौल

किरोड़ीलाल मीणा ने सभा के दौरान बोला था कि मौजूदा विधायक अमृता मेघवाल को भी एक मंदिर में जाने से रोका गया था, लेकिन वे सत्ता के कारण चुप रही। इधर, इस बयान से दलित वर्ग में खासा माहौल बिगड़ा। उन्होंने अमृता मेघवाल के खिलाफ रोष जताया कि विधायक होने के बावजूद वे दलितों के साथ नहीं आ रही है, जबकि उनके स्वयं के साथ भी ऐसी घटना हुई। इधर, मेघवाल समाज के लोग ही अमृता के खिलाफ होने लग गए हैं। किरोड़ी के इस बयान का इतना असर हुआ कि अमृता मेघवाल को आखिरकार सफाई के लिए प्रेस नोट निलकवाना पड़ा।

अमृता मेघवाल के खिलाफ भी जालोर विधानसभा में बन रहा माहौल

रिकॉर्ड वोटो से जीतने वाली जालोर विधायक अमृता मेघवाल के खिलाफ अब माहौल विपरित है। मोदी लहर में जीतने वाली अमृता के लिए इस बार जीत तो दूर की बात टिकट तक मिलना मुश्किल हो गया है। यदि टिकट मिल भी जाता है तो उसके लिए जीतना बेहद मुश्किल है। चार साल में विकास के नाम पर कोई भी ऐसा कार्य नहीं किया, जिसको लेकर वे आगामी विधानसभा मेें वोट मांग सकेे।

चार साल में से 1 साल तो बाहर ही रही

चार साल के कार्यकाल में से विधायक एक साल तो बाहर ही रही। एक साल तक उनके जनप्रतिनिधि के इस तरह बाहर रहने को आम जनता ने स्वीकार नहीं किया। पिछे बचे 3 साल में कोई ऐसा खास कार्य नहीं हुआ, जिससे लोग उन्हें वोट दे।

पति ने संभाली एक साल तक विधायकगिरी

विधायक अमृता मेघवाल जब एक साल तक अपने विधानसभा में नहीं थी तब उनके पति बाबूलाल मेघवाल ने पूरी तरह विधायकगिरी दिखाई। उन्होंने तो एक नई पोस्ट तक खड़ी कर दी थी विधायक पति। एक साल तक बाबूलाल मेघवाल का विधायक के रूप में जनता के बीच मौजूद रहना कहीं ना कहीं विधायक अमृता मेघवाल के ही खिलाफ रहा।

सायला क्षेत्र की विधायक का भी आरोप

विधायक अमृता मेघवाल पर एक अन्य आरोप भी लग रहा है कि वे सायला क्षेत्र में ही अधिक रहती है। उनका ज्यादा समय सायला क्षेत्र में बितता है। हालांकि यह भी नहीं कि उन्होंने सायला क्षेत्र में रहकर सायला क्षेत्र में कोई विशेष कार्य करवाए हो।

बाबूलाल चाहते थे अगली बार विधायक बनना, पर मामला हुए फेल

एक साल तक अमृता मेघवाल के विधानसभा क्षेत्र में नहीं रहने के दौरान उनके पति बाबूलाल मेघवाल विधायक के नाते कार्यक्रम में मौजूद रहने लगे। यहां तक की फीते भी काटने लगे। बाबूलाल मेघवाल चाहते थे कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे स्वयं टिकट लाकर विधायक बने, लेकिन उनका सपना अब टूटता जा रहा है। लोगों के बीच उनके विरोध को अब वे स्वयं जान चुके हैं कि इस बार नैय्या पार होना मुश्किल है।

रामलाल मेघवाल के प्रति लोगों की भावना आज भी

पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल गत चुनाव में मोदी लहर में हार गए थे। अमृता मेघवाल के चार साल के कार्यकाल में अब लोगों को यह लग गया है कि रामलाल मेघवाल हर तरीके से उनके लिए एक अच्छे जनप्रतिनिधि थे। लोग दोबारा रामलाल मेघवाल की तरफ जुड़ते जा रहे हैं।

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