पहले दिया कमीशन, फिर थमाया 37 लाख की वसूली का आदेश

अल्लाह बख्श खान @ जालोर


राजस्थान सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की एक चूक ई-मित्र संचालकों पर भारी पड़ रही है। भामाशाह नामांकन करने के बदले ई-मित्र संचालक को कमीशन देने के बाद अब अचानक विभाग ने इसे अपनी भूल बताते हुए अतिरिक्त राशि की वसूली का आदेश जारी कर दिया। इतना ही नहीं राशि जमा नहीं कराने तक ई-मित्र संचालकों की आईडी भी ब्लॉक कर दी गई है। रिकवरी की यह राशि एक हजार से लेकर पिचासी हजार रुपए तक है। अकेले जालोर जिले में 263 ई-मित्र संचालकों से 37 लाख रुपए की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं।
ऐसे चला पता
दरअसल, राज्यभर में ई-मित्र संचालकों के खाते से बीते दिनों हजारों रुपए की राशि कम होने लगी। जालोर, पाली, जोधपुर व बाड़मेर सहित तकरीबन सभी जिलों में ई-मित्र संचालकों के खातों से बैलेंस की राशि कम हुई। इस दौरान इन ई-मित्र संचालिकों की आईडी भी ब्लॉक कर दी गई। ई-मित्र संचालकों ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली तो उन्हें गलती से ज्यादा कमीशन जमा होने का हवाला देकर राशि जमा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही राशि जमा नहीं होने तक आईडी ब्लॉक रखने की बात भी कही गई।
जालोर में 36 लाख 85 हजार की रिकवरी
अकेले जालोर जिले में सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से 263 ई-मित्र संचालकों से 36 लाख 85 हजार 172 रुपए की रिकवरी निकाली गई है। हालांकि विभाग ने शुरुआत में बिना सूचना दिए ही ई-मित्र संचालकों के खातों से राशि निकाल दी। साथ ही शेष राशि तत्काल जमा कराने का आदेश दिया। इस दौरान 91 ई-मित्र संचालकों ने शेष राशि जमा करवाकर फिर से आईडी शुरू करवाई। इस तरह अब तक विभाग 16 लाख 59 हजार 159 रुपए की रिकवरी कर चुका है। जबकि अब तक 172 ई-मित्र संचालकों के 20 लाख 26 हजार 13 रुपए बकाया चल रहे हैं। ऐसे में इन ई-मित्र कियोस्क में फिलहाल कार्य बंद है।
खातों से नदारद हो गया बैलेंस
विभाग ने ना केवल जिले के 263 ई-मित्र संचालकों की रिकवरी निकाली, बल्कि इनके खातों से राशि की कटौती भी कर दी। शेष राशि के लिए इन लोगों को आदेश भेज कर जल्द शेष राशि जमा कराने एवं शपथ पत्र देने की हिदायत दी है। हैरत की बात यह है कि बिना सूचना विभाग ने इनके खाते से 1 व 2 रुपए से लेकर 26 हजार रुपए तक की राशि काटी है। ई-मित्र संचालकों को भी इसकी भनक तब लगी जब उन्होंने अपने खातों का बैलेंस चैक किया।
ई-मित्र संचालक बेबस
विभाग की यह चूक खासकर के जिले के छोटे गांव-कस्बों में संचालित ई-मित्र कियोस्क पर भारी पड़ रही है। अव्वल तो गांव-कस्बों में ई-मित्र कियोस्क का संचालन करने वाले अधिकांश वे युवा है जिन्होंने स्वरोजगार की आस में ई-मित्र शुरू किए। तिस पर इनसे इन्हें ज्यादा आय भी नहीं होती। भामाशाह योजना में इन्हेें जरूर काम के अनुरूप कमीशन दिया गया था। इसके लिए इन्हें ग्रामीणों से भागदौड़ कर लक्ष्य के अनुरूप भामशाह कार्ड भी बनवाए। अब विभाग की ओर से आनन-फानन में ई-मित्र संचालकों की आईडी ब्लॉक कर उनके खातों से ज्यादा दिए गए भुगतान की वसूली करनी शुरू कर दी। कइयों के खातों में जीरो बैलेंस तक कर दिया गया। ई-मित्र संचालक बेबस है। तो दूसरी तरफ उपभोक्ताओं की ओर से जमा कराए गए बिल भी अटकने की आशंका रहेगी।
यह बताई वजह
इधर, विभाग ने ई-मित्र संचालकों को तर्क दिया है कि उन्हें भामाशाह कार्ड के लिए प्रति कार्ड 24 रुपए दिए जाने थे, लेकिन भूल से उनके खाते में 42 रुपए जमा हो गए। लिहाजा, अतिरिक्त राशि रिकवर की जा रही है। तो दूसरी तरफ ई-मित्र संचालकों के टीडीएस कटौती में भारी अनियमितता सामने आई। कई ई-मित्र संचालक तो ऐसे हैं जिनके कमीशन के बराबर रिकवरी बताई गई है।

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