ज्वैलर्स का लालच बना कपिल की हत्या की वजह

जालोर. जालोर के बहुचर्चित कपिल अग्रवाल हत्याकांड का करीब पौने महीने बाद पुलिस ने बुधवार को खुलासा कर दिया। इस पूरी वारदात में एक ज्वैलर्स का लालच कपिल की हत्या की वजह बन गया। सैम्पल दिखाने गए कपिल के पास आभूषण देखकर इस ज्वैलर्स के मन में लालच आ गया और उसने अपने एक मित्र को इसकी सूचना दे दी। इसके बाद इसमें आपराधिक गतिविधियों में लिप्त लोग जुड़ते गए और कपिल की हत्या के साथ ही लूट की वारदात को अंजाम देकर आरोपित फरार हो गए। फिलहाल, पुलिस ने मुख्य आरोपित नरेश माली व रमेशपुरी गोस्वामी के साथ ही सहयोगी प्रकाश मीणा, लक्ष्मणनाथ व प्रकाश उर्फ राजू को गिरफ्तार कर लिया। जबकि सहयोगी अमन, देवाराम देवासी, जीतूसिंह रावणा राजपूत की तलाश जारी है। वहीं ज्वैलर्स राजेंद्र कोठारी को दस्तयाब कर पूछताछ की जा रही है।

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यह था मामला

मृतकपाड़ीव (सिरोही) निवासी कपिल अग्रवाल (27) पुत्र जितेंद्र अग्रवाल जयपुर में ज्वैलरी का काम करता था। वह अलग-अलग शहरों में घूम कर ज्वैलरी के सैम्पल दिखाकर ऑर्डर लेता था। दिनांक १९ अगस्त को कपिल अपने गांव पाडि़व (सिरोही) से जालोर आया था। जालोर में ज्वैलरी की दुकानों पर वह सैम्पल दिखाते हुए मुख्य बाजार स्थित दर्शन ज्वैलर्स पहुंचा। जहां उसने दर्शन ज्वैलर्स के मालिक राजेंद्र कोठारी को सैम्पल बताए। कपिल सैम्पल दिखाकर जैसे ही दुकान से बाहर निकला। पीछे से राजेंद्र कोठारी ने अपने मित्र जालोर निवासी जितेंद्रसिंह उर्फ जीतूसिंह रावणा राजपूत को मोबाइल पर फोन किया। उसने जीतूसिंह को बताया कि जयपुर से एक ज्वैलर्स सैम्पल दिखाने के लिए जालोर आया हुआ है। उसके पास काफी मात्रा में सोना है। जिसको लूट लो। लूट के सोने को मैं खरीद लूंगा। इस पर जीतूसिंह ने अपने मित्र मुख्य आरोपित रमेश पुरी व नरेश माली को पूरी बात बताई। इस दौरान रमेश व नरेश दोनों होमगार्ड प्रकाश मीणा के पास गए और उससे बाइक मांगी। साथ ही प्रकाश को उसका हिस्सा देने की बात भी की। इस पर प्रकाश ने बाइक की व्यवस्था की। इस दौरान आरोपितों ने बाइक की नम्बर प्लेट भी हटा दी। ताकि किसी को बाइक के बारे में पता नहीं चल सके। इस बीच, प्रकाश को शाम को बाइक लेने का कहकर वापस भेज दिया।

फिर बनाई अपहरण की योजना

इस दौरान आरोपितों को लगा कि खास स्थितियों में कपिल का अपहरण भी करना पड़ सकता है। ऐसे में उसको जबरन ले जाने के लिए गाड़ी की जरूरत पड़ेगी। जिस पर उन्होंने देवाराम देवासी व अमन को साथ ले लिया। इस दौरान ये लोग देवाराम की गाड़ी लेकर मौके की तलाश में रहे। वहीं इस दौरान जीतूसिंह लगातार कपिल की रैकी करता रहा। इस बीच, जीतू ने नरेश, रमेश, देवाराम व अमन को तिलकद्वार पर आने के लिए कहा। यहां इन लोगो ंने साथ बैठकर कपिल के अपहरण की साजिश रची और तय किया कि कपिल को झांसा देकर बाइक पर बैठाना है। उसके बाइक पर नहीं बैठने की स्थिति में जबरन देवाराम की इनोवा में डाल कर सूनसान जगह पर ले जाकर लूट लेंगे।

बस स्टैण्ड का कहकर झरणेश्वर रोड ले गए

ये लोग कपिल की लगातार रैकी करते रहे। इस बीच, कपिल अग्रवाल हॉस्पीटल रोड स्थित रूक्मणी ज्वैलर्स में सैम्पल दिखाकर जैसे ही  बाहर निकला। उसे बाहर रोड पर नरेश खड़ा मिला। इस पर कपिल ने उसे सिरोही के लिए बस के बारे में पूछा। तो नरेश ने कहा कि वह बस स्टैण्ड ही जा रहा है इसलिए उसे भी वहां छोड़ देगा। इस पर कपिल नरेश की बाइक पर बैठ गया। कुछ ही दूर जाने पर उन्हें योजनानुसार रमेश रास्ते में खड़ा मिला। जिस पर नरेश ने उसे भी साथ ले लिया। यह लोग बस स्टैण्ड तक तो धीरे-धीरे चलते रहे, लेकिन जैसे ही बस स्टैण्ड पार हुआ। इन्होंने बाइक की स्पीड बढ़ा दी और कपिल को लेकर झरणेश्वर रोड पर ले गए। इस मामले की रैकी कर रहे देवाराम व अमन भी इनोवा लेकर पीछे-पीछे झरणेश्वर रोड पहुंच गए।

भागने की कोशिश की, लेकिन चाकू घोंप दिया

झरणेश्वर रोड पर ले जाते समय कपिल ने अनहोनी की आशंका में बाइक रुकवाने की कोशिश भी की, लेकिन स्पीड तेज होने की वजह से वह बाइक को रुकवा नहीं पाया। ऐसे में बाइक रुकते ही कपिल ने भागने की कोशिश की। लेकिन रमेश व नरेश ने उसे पकड़ लिया और चाकू दिखाकर बैग देने को कहा। कपिल ने विरोध किया तो दोनों ने मिलकर कपिल पर दनादन चाकू से वार कर दिए। इस दौरान दोनों उसे घायलावस्था में ही छोड़कर बैग लेकर भाग गए। आगे जाकर दोनों इनोवो कार में बैठ गए। जबकि बाइक को अमन देकर उसे प्रकाश को सुपुर्द कर काठाड़ी आने के लिए कहा। इस दौरान देवाराम, रमेश व नरेश गाड़ी में बैठकर फरार हो गए।

काठाड़ी से बैंगलूरु होते हुए हैदराबाद पहुंचे

इधर, अमन ने प्रकाश मीणा को अपनी बाइक लेने के लिए बिशनगढ़ आने को कहा, लेकिन जल्दबाजी वह बाइक को पहाड़पुरा ही लावारिस छोड़कर काठाड़ी पहुंच गया। बाद में प्रकाश मीणा ने पहाड़पुरा से अपनी बाइक ली। इधर, अमन काठाड़ी पहुंचने के बाद देवाराम देवासी, नरेश माली व रमेश के साथ इनोवा लेकर बालोतरा, सांचौर, अहमदाबाद, सूरत होते हुए वापी पहुंचे। जहां से देवाराम व अमन अपना हिस्सा लेकर फरार हो गए। नरेश व रमेश वहां से बैंगलूरु पहुंच गए। रास्ते में नरेश ने अपने ममेरे भाई प्रकाश को मामले की जानकारी दी और माल बेचने में सहयोग करने को कहा। इस पर वह तत्काल तैयार हो गया। इस दौरान प्रकाश ने आभूषणों को अपने कब्जे में लेकर कुछ आभूषण बेच दिए और उसके रुपए नरेश व रमेश को दिए। साथ ही दोनों को अपने एक मित्र के यहां रुकने के लिए मैंगलोर भेज दिया। बाद में प्रकाश खुद भी मैंगलोर पहुंच गया और बचे हुए आभूषण रमेश व नरेश को दिए और उन्हें हुबली होते हुए हैदराबाद पहुंचने के लिए कहा। जबकि खुद अपनी प्रेमिका के साथ बैंगलूरू आ गया।

हैदराबाद में धरे गए

इसके बाद नरेश व रमेश अपने हिस्से का माल लेकर हैदराबाद पहुंच गए। जहां दोनों छुपते छिपाते इधर-उधर घूमते रहे। इस दौरान रमेश ने अपने मित्र जालोर के आसनपोल निवासी लक्ष्मणनाथ को बुलाया और माल का बंटवारा किया। इस दौरान नरेश फिर से बैंगलूरु लौट गया। जबकि रमेश व लक्ष्मणनाथ हैदराबाद में ही रहे। इधर, आरोपितों की तलाश में हैदराबाद गए पुलिस निरीक्षक बाबूसिंह के नेतृत्व में हैड कांस्टेबल विनोद कुमार, कांस्टेबल वी.पी. सिंह ने रमेशपुरी व सह आरोपी लक्ष्मणनाथ को दस्तयाब कर लिया। जबकि उप निरीक्षक भीखाराम के नेतृत्व में कांस्टेबल बाबूलाल व सुरेश ने मुख्य आरोपी नरेश व सह आरोपी राजू उर्फ प्रकाश को बैंगलूरु से दस्तयाब किया। जहां से आरोपियों को जालोर लाया गया।

आपराधिक वारदातों में लिप्त रहे हैं आरोपित

हत्याकांड के मुख्य आरोपित नरेश माली व रमेशपुरी गोस्वामी पहले से ही आपराधिक वारदातों में लिप्त रहे हैं। नरेश माली भीनमाल के एक हत्याकांड में जेल गया है और वर्तमान में जमानत पर है। जबकि नरेश माली व रमेशपुरी ने पूर्व में विराणा गांव में लूट की वारदात को भी अंजाम दिया था। लूट व हत्या के अलावा दोनों आरोपितों के खिलाफ अन्य मामलों में भी चालान पेश हो रखा है।

बार बालाओं पर उड़ाए रुपए

मृतक कपिल के पास करीब ८०० ग्राम सोने के आभूषण थे। जिन्हें लूट कर आरोपित वापी पहुंचे। वहां देवाराम व अमन ने अपना हिस्सा लेकर अलग हो गए। जबकि रमेश व नरेश यहां से बैंगलूरु, मैंगलोर होते हुए हैदराबाद पहुंचे। इन जगहों पर दोनों ने प्रकाश उर्फ राजू, लक्ष्मणनाथ के साथ बार बालाओं पर जमकर रुपए उड़ाए। ये लोग बार में शराब की पार्टी करने के साथ ही लूटे गए माल से मिली सोने के मोतियों की माला को बार बालाओं को पहनाने से भी नहीं चूके।

कांस्टेबल सुरेश की हत्या के लिए खरीदा था चाकू

चूंकि उप निरीक्षक भीखाराम के नेतृत्व में कांस्टेबल बाबूलाल व सुरेश ने मुख्य आरोपी नरेश व सह आरोपी राजू उर्फ प्रकाश को बैंगलूरु से दस्तयाब किया था। इससे पूर्व ही नरेश को टीम के बैंगलूरु पहुंचने की जानकारी मिल चुकी थी। कांस्टेबल सुरेश की ओर से आरोपितों को पकडऩे के लिए सक्रिय भूमिका को देखते हुए नरेश ने उसे मारने की योजना बना ली थी। इस मकसद से उसने एक चाकू भी खरीदा था। ताकि सुरेश को उससे मार सके। लेकिन इससे पहले ही वह धरा गया।

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