बिहार में फिर शुरू हुई जेडीयू और आरजेडी में बयानबाजी

अर्थन्यूज नेटवर्क

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों में खलबली मची हुई है। सभी पार्टियां अब यह सोचने पर मजबूर हो गई है कि आखिर भाजपा या मोदी को 2019 के लोकसभा चुनावों में कैसे रोका जाए? लेकिन विपक्ष भी आपस में कहीं एकजुट नजर नहीं आ रहा है।

वहीं बिहार विधान परिषद के सभापति पद को लेकर आरजेडी और जेडीयू के बीच फिर तकरार शुरु हो गई है। लालू यादव इस पद पर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बैठाना चाहते हैं लेकिन नीतीश कुमार मौजूदा सभापति अवधेश नारायण सिंह के साथ हैं। अवधेश नारायण सिंह बीजेपी के विधान पार्षद हैं लेकिन चुनाव में नीतीश कुमार ने उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा।

इस मामले में आरजेडी और जेडीयू के बीच जमकर बयानबाजी शुरू हो गई है। बिहार विधान परिषद में आंकड़ों को देखें तो जेडीयू अवधेश नारायण सिंह को समर्थन दे तो उनका फिर से सभापति बनना तय है। 76 सदस्यों की विधानपरिषद में सबसे ज्यादा 30 सीट जेडीयू के पास है जबकि दूसरे नंबर पर बीजेपी के पास 23 सीट हैं। दोनों मिलाकर 53 सीटें होती है जबकि अवधेश को सभापति बनने के लिए सिर्फ 39 सीटें ही चाहिए।

वहीं इसके दूसरी ओर विधानपरिषद चुनाव में अवधेश नारायण सिंह के खिलाफ जेडीयू की ओर से उम्मीदवार नहीं उतारने से भाजपा काफी खुश है, तो आरजेडी काफी खफा नजर आ रही है। इसको लेकर दोनों पक्षों में बयानबाजी फिर से शुरू हो चुकी है।

कांग्रेस और आरजेडी के हिस्से में भी एक भी सीट नहीं आयी है। लालू इस हार की कसर राबड़ी देवी को विधानपरिषद का सभापति बनाकर पूरा करना चाहते हैं लेकिन नीतीश कुमार के सियासी समीकरण कुछ और ही बयां कर रहे है।

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