दीपावली पर लक्ष्मी कृपा के लिए आज ऐसे करें आह्वान

हिन्दू धर्म में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महालक्ष्मी व्रत करने का विधान है। शास्त्रों में लक्ष्मी माता के आठ रूपों का वर्णन किया गया है। आज के दिन महालक्ष्मी के गजलक्ष्मी स्वरूप की आराधना करने का विधान है, अर्थात् २३ सितम्बर २०१६ शुक्रवार को व्रव व पूजा करनी चाहिए। यह पौराणिक काल से मनाया जा रहा है।

तब से है प्रचलन

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शास्त्रों के अनुसार महाभारत काल में जब महालक्ष्मी पर्व आया। उस समय हस्तिनापुर की महारानी गांधारी ने देवी कुन्ती को छोडक़र नगर की सभी स्त्रियों को पूजन का निमंत्रण दिया था। इस दौरान गांधारी के 100कौरव पुत्रों ने बहुत सी मिट्टी लाकर सुंदर हाथी बनाया व उसे महल के मध्य स्थापित किया। जब महिलाएं पूजा के लिए गांधारी के महल में जाने लगी तो कुन्ती बड़ी उदास हो गई। इस पर अर्जुन ने अपने पिता इंद्र से स्वर्गलोक जाकर ऐरावत हाथी ले आए। कुन्ती ने सप्रेम पूजन किया। जब गांधारी व कौरवों समेत सभी ने सुना कि कुन्ती के यहां स्वयं एरावत आए हैं तो सभी ने कुंती से क्षमा मांगकर गजलक्ष्मी के ऐरावत का पूजन किया।

ऐसे करें पूजन

सुबह स्नान से पहले हरी दूब को अपने पूरे शरीर पर घिसें। बाद में व्रत का संकल्प करें। पूरा दिन व्रत रखकर संध्या के समय लकड़ी की चौकी पर सफेद रेशमी कपड़ा बिछाएं। इसके बाद देवी लक्ष्मी के गजलक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। एक कलश पर अखंड ज्योत स्थापित करें, तथा यंत्र को पंचामृत से स्नान कराकर १६ प्रकार से पूजन करें। मेवा, मिठाई, सफेद दूध की बर्फी का भोग लगाएं। पूजन सामग्री में चंदन, ताल, पत्र, पुष्प माला, अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल रखें। नए पीले सूत के 16-16 की संख्या में 16 बार रखें। पीले कलावे में 16 गांठे लगाकर लक्ष्मी जी को अर्पित करें। इसके बाद महालक्ष्मी पर सोलह शृंगार चढ़ाएं। पूजन के समय ध्यान रखें की देवी का मुख उत्तर दिशा में हो व सभी व्रती पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके पूजन करें।

ऐसे करें आह्वान

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चंद्रमा के निकलने पर तारों को अर्घ दें व उत्तरमुखी होकर पति-पत्नी एक-दूसरे का हाथ थाम कर देवी महालक्ष्मी को दीपावली पर अपने घर आने के लिए आग्रह करें। इसके बाद देवी पर चढ़ाई 16 वस्तुएं चुनरी, सिंदूर, लिपिस्टिक, रिबन, कंघी, शीशा, बिछिया, नाक की नथ, फल, मिठाई, मेवा, लौंग, इलायची, वस्त्र, रुमाल श्रीफल इत्यादि ब्राह्मणी को दान करें। पूजन पश्चात 16 गांठे लगाएं हुए पीले कालवा घर का हर सदस्य ब्राह्मणी द्वारा अपनी कलाई पर बंधवाएं।

सोलह बोल की कथा

अमोती दमो तीरानी, पोला पर ऊचो सो परपाटन गांव जहां के राजा मगर सेन दमयंती रानी, कहे कहानी। सुनो हो महालक्ष्मी देवी रानी, हम से कहते तुम से सुनते सोलह बोल की कहानी।

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