किरोड़ी का भाजपा में आना, कांग्रेस के लिए फायदा, जानिए क्यों?

अर्थ न्यूज. जयपुर

दस साल तक भाजपा से दूर रहने वाले पूर्व मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के दोबारा भाजपा में शामिल होने की औपचारिकता आज पूरी हो जाएगी। इसके बाद राजपा का भाजपा में विलय हो जाएगा। राजनीतिक समीकरणों की बात करे तो राजपा का भाजपा में विलय होने के बाद सीधे तौर पर फायदा कांग्रेस को ही मिलेगा।

आइए जानते हैं कैसे?

वर्तमान में किरोड़ीलाल मीणा व निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल तीसरे मोर्चो के रूप में राजस्थान में तेजी से उभर रहे थे। चुनावी साल होने और इनकी चुनावी सभाओं में उमड़ी भीड़ भाजपा के अंदर खलबली मचा रही थी। जिस तरह बाड़मेर में सभा की गई और फिर मीणा ने आहोर में जिस तरह महारैली का आयोजन किया। उससे जोधपुर संभाग में तीसरे मोर्चे का एक अलग ही चुनावी माहौल तैयार हो गया था, लेकिन बता दे कि किरोड़ी लाल मीणा यदि तीसरे मोर्चे के रूप में राजस्थान की राजनीति में खड़े होते तो शत प्रतिशत नुकसान कांग्रेस को होता। क्योंकि किरोड़ीलाल के साथ कांग्रेस का ही वोट बैंक जुड़ रहा था, जबकि भाजपा का वोट बैंक स्थाई था। इधर, अब किरोड़ीलाल के भाजपा में जाने से कांग्रेस का टूटने वाला वोट बैंक कांग्रेस से दोबारा जुड़ गया है।

वसुंधरा से खफा भाजपा का वोट बैंक टूटेगा

कई जातियां वर्तमान के समय में वसुंधरा राजे से बेहद खफा है। उनके नेतृत्व में यदि आगामी विधानसभा चुनाव होगा तो कई जातियां भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस को वोट देगी। कांग्रेस का वोट बैंक स्थाई है साथ ही भाजपा से टूटने वाले वोट भी कांग्रेस को मिलेंगे। यदि राजस्थान में तीसरा मोर्चा होता तो कहीं ना कहीं कांग्रेस के वोट टूटते और फायदा भाजपा ले जाती। राजपूत, रावणा राजपूत समाज तो वसुंधराराजे के पूरी तरह विरोधी है। आनंदपालसिंह के एनकाउंटर मामले में उपजे विवाद ने वसुंधरा की नींद उड़ा दी थी। वसुंधरा अब जैसे-तैसे कर राजपूत और रावणा राजपूत समाज को साथ लेकर इस चुनाव में वोट हासिल करना चाहती है।

आहोर में किरोड़ी की सभा के बाद अब कांग्रेस को फायदा

जालोर जिले के आहोर मुख्यालय पर हाल ही में किरोड़ीलाल मीणा ने एक महारैली का आयोजन किया था। जिसमें उन्होंने दलितों को साथ लेकर सामाजिक न्याय व्यवस्था के खिलाफ विरोध जताया था। इधर, कांग्रेस से दलितों के टूटने के कारण आहोर में भाजपा को फायदा मिल रहा था। वहीं पंकज मीणा के भी आहोर से चुनाव लडऩे की मंशा के बाद भाजपा को ही फायदा था। इधर, अब किरोड़ीलाल मीणा के भाजपा में जाने के बाद दलितों के वोट दोबारा कांग्रेस को ही मिलेंगे। ऐसे में आहोर में इस बार कांग्रेस अच्छी स्थिति में देखी जा रही है।

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