जालोर : एनएचएम निदेशक ने चिकित्सा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को पिलाई लताड़

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के शासन सचिव एवं एनएचएम निदेशक नवीन जैन ने ली अधिकारियों की बैठक
चिरायु नन्ही जान, हमारी शान कार्यक्रम के लिए जिले के प्रत्येक ब्लॉक की बनेगी विशेष कार्य योजना

अर्थन्यूज नेटवर्क. जालोर

जालोर जिले में शुरू होने वाले चिरायु नन्ही जान, हमारी शान कार्यक्रम के संबंध में गुरुवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के शासन सचिव एवं एनएचएम निदेशक नवीन जैन ने जिला कलक्ट्री सभाकक्ष में अधिकारियों की बैठक ली।
बैठक में उन्होंने जिले की मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, प्रजनन दर, संस्थागत प्रसव, एचबीएनसी, एनबीएसयू, एसएनसीयू, रेफरल सेवाएं आदि की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रसव कक्ष में महिला व उसके बच्चे की मौत होना बेहद सोचनीय पहलू है, क्योंकि चिकित्सकों को लेबर रूम में रखी जाने वाली दवाइयां के बारे में भी पता नहीं होता कि वे कहां पर रखी हुई है। पूछने पर एएनएम व अन्य पर जिम्मेदारी डाल दी जाती है। उन्होंने कहा कि लेबर रूम के प्रोटोकॉल के बारे में पढकर चिकित्सक करने के बाद वे ही उनको फोलो नहीं करते है। इस कारण प्रसव कक्ष में कहीं पर नवजात की मौत तो कहीं पर प्रसूूता की मौत हो जाती है। इन सबसे बडी बात तो यह है कि गर्भवती महिला की चार एएनसी जांच, हाई रिस्क प्रेगेनसी की ओर भी ध्यान नहीं दिया जाता है। वहीं विभाग के अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को थोडी सी भी परेशानी होने पर रैफर कर दिया जाता है। यहीं वजह है कि जालोर जिले में लोग प्राइवेट अस्पतालों में डिलीवरी करवाते हैं।

एमसीएचएन दिवस रहेगा बेस

नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए विभाग की ओर से प्रत्येक गुरूवार को मनाए जाने वाले मातृ शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर एएनएम द्वारा आंगनबाडी केंद्र व सब सेंटर पर दी जाने वाली सेवाओं की सख्त मॉनिटरिंग और आरसीएच रजिस्ट्रर की जांच विभागीय अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए, जो बेहद कम की जा रही हैं, जब तक गर्भवती महिलाओं की चार एएनसी जांच और प्रसव व उसके बाद दी जाने वाली सेवाएं समुचित रूप से नहीं दी जाएगी, नवजात शिशु मृत्यु दर कम नहीं होगी।

जमीर में झांकने की जरूरत

उन्होंने कहा कि चिकित्सा विभाग ऐसा विभाग है, जिसकी सेवाएं हर व्यक्ति लेता है, ऐसा कोई भी नहीं है जो विभाग की सेवाएं नहीं लेता है, लेकिन कुछ लोगों की वजह से वहीं आम आदमी पूरे विभाग को भी कोसता है। इस कारण विभागीय अधिकारियों व चिकित्सों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने जमीर में झांकर देखें कि वे जिस आमजन के उपचार के बदले जो मोटी रकम वेतन के रूप में ले रहे हैं, उसके प्रति उनका व्यवहार कैसा है।

रेफर करने से पूर्व दें संपूर्ण जानकारी

मिशन निदेशक ने गर्भवती महिला व शिशु को उच्च संस्थान में रैफर करने से उसके पूर्व परिजनों को उच्च संस्थान में मिलने वाले चिकित्सक के बारे में जानकारी देने के निर्देश देते हुए कहा कि पीएचसी से यदि सीएचसी तथा जिला अस्पताल में रैफर करते हैं तो सीएचसी व जिला अस्पताल में कार्यरत चिकित्स व वार्ड प्रभारी के मोबाइल नंबर भी दें, ताकि वे वहां पहुंचने के बाद उससे संपर्क कर सकें। साथ ही 104 व 108 एम्बुलेंस के चालक के मोबाइल नंबर भी अपने पास रखे, ताकि सीधे उनसे संपर्क कर सकें और रैफर करने में अनावश्यक देरी नहीं हो। इससे रैफरल सुविधा आसान होंगी।

रिसोर्स पर्सन तैयार करने के निर्देश

मिशन निदेशक श्री जैन ने जिले के सभी आठों ब्लॉकों की  कार्य योजना बनाने के साथ सीएमएचओ तथा बीसीएमओ को अपने स्तर पर रिर्सोस पर्सन तैयार करने भी निर्देश दिए, ताकि वे चिकित्सा संस्थानों में कार्य करने वाले चिकित्सक, एएनएम, एलएचवी से संपर्क कर उनको वीडियो दिखाकर प्रसव कक्ष के प्रोटोकॉल व अन्य जानकारी उपलब्ध कराने के साथ उनको प्रेरित भी करें। उन्होंने कहा कि इस कार्य में यूनिसेफ की टीम भी सहयोग करेगी।

बैठक बुलाने के दिए निर्देश

बैठक में मिशन निदेशक केे आदर्श पीएचवी के चिकित्सा अधिकारी प्रभारियों से सीएचसी की दूरी तथा बीमार नवजात शिशु को किस सीएचसी में रैफर करने की जानकारी लेने पर चिकित्सकों द्वारा जिस सीएचसी में एनबीएसयू की सुविधा नहीं है उसमें रैफर करने की बात कहने पर आरसीएचओ डॉ डीसी पुन्सल को पीएचसी प्रभारियों की बैठक लेकर उनको एनबीएसयू व एसएनसीयू वाले चिकित्सा संस्थान की जानकारी देने व वार्ड प्रभारी के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों की लापरवाही के कारण जिले में प्राइवेट अस्पताल पनप रहे हैं यही कारण है कि 50 प्रतिशत डिलीवरी प्राइवेट अस्पतालों में हो रही है।

कार्यक्रम की दी जानकारी

इससे पूर्व मिशन निदेशक नवीन जैन ने नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए शुरू होने वाले चिरायु नन्ही जान, हमारी शान कार्यक्रम की जानकारी देते बताया कि यह कोई नया कार्यक्रम नहीं है, इससे पहले भी विभाग द्वारा यह कार्य किया जा रहा है, लेकिन कुछ जिलों के आंकडे अच्छे नहीं है, इनमें से जालोर भी एक है। इस कारण यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वहीं यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ अनिल अग्रवाल ने कार्य योजना बनाते समय रखी जाने वाली सावधानियां के बारे में जानकारी दी।

जिला कलक्टर ने किया आश्वासन

बैठक में जिला कलक्टर लक्ष्मीनारायण सोनी ने शासन सचिव व मिशन निदेशक नवीन जैन को आश्वसत किया कि चिकित्सकों के सहयोग से जालोर जिले में शानदार काम होगा और यह कार्य तीन माह में नजर आएंगे। इससे पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ संजीव जैन व सीएमचएचओ डॉ जीएस देवल ने पहली बार जालोर पधाने पर मिशन निदेशक नवीन जैन व विभाग की बैठक में पहली बार आने पर जिला कलक्टर एलएन सोनी का स्वागत किया।

मातृ शिशु स्वास्थ्य केंद्र का किया निरीक्षण

मिशन निदेशक नवीन जैन ने भीनमाल रोड पर बने मातृ शिशु स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने संस्थान में बने टीकाकरण वार्ड में जाकर कोल्ड चैन मैनेजमेंट, एमसीएचएन दिवस पर दी गए टीकों व उपलब्धता के रिकार्ड आदि की जानकारी ली। उन्होंने लेबर रूम में चैक लिस्ट और जेएसवॉय कार्ड तथा एसएनसीयू वार्ड के निरीक्षण के दौरान भर्ती किए जाने वाले बच्चों का फॉलोअफ करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने एमसीएच में पौधारोपण भी किया। इस दौरान सीएमएचओ डॉ जीएस देवल, पीएमओ डॉ एसपी शर्मा, डीपीएम अजयसिंह कडवासरा, शहरी जिला कार्यक्रम प्रबंधक हरफुल घिन्टाला, यूनिसेफ के जिला प्रतिनिधि डॉ गिरिश माथुर व अन्य अधिकारी व कार्मिक मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Page generated in 0.732 seconds. Stats plugin by www.blog.ca