राजनीति का अखाड़ा बनी जालोर नगर परिषद, विधायक पति व पूर्व विधायक के वर्चस्व की लड़ाई के बीच आयुक्त बने फुटबॉल

अर्थ न्यूज. जालोर

जालोर नगर परिषद इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बनी हुई है। एक तरफ जहां वर्तमान विधायक के पति बाबूलाल अपना वजूद दिखाने के लिए आयुक्त को रातों-रात एपीओ करवा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व विधायक एवं संघ लॉबी के जोगेश्वर गर्ग अपने वर्चस्व को साबित करने के लिए एपीओ हुए आयुक्त के ऑर्डर को कैंसिल करवा रहे हैं इधर, जब एपीओ हुए आयुक्त के ऑर्डर को कैंसिल करवाने में पूर्व विधायक गर्ग कामयाब रहे तो बाबूलाल ने हाल ही में लगाए गए आयुक्त शिकेश कांकरिया को आगे कर कोर्ट से स्टे ले आए। जालोर शहर के विकास को लेकर मंथन करने की बजाय भाजपा के पदाधिकारी आपस में ही अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। जिसका खामियाजा जालोर की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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जानिए, क्या था मामला

जालोर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 29 का पार्षद हंसमुख नागर प्याऊ के नाम पर अतिक्रमण करवा रहा था। जिसे आयुक्त सौरभ जिंदल ने शिकायत होने पर काम रुकवा दिया था। यह कार्य विधायक के पति बाबूलाल की शह पर चल रहा था क्योंकि इस संबंध में एक ऑडियों भी वायरल हुआ था। जिसमें आयुक्त जिंदल यह कह रहे थे कि बाबूलाल बीच में टांग क्यों अड़ा रहे हैं और कार्य कार्य को चलते रहने देने की बात कह रहे हैं। इस मामले को लेकर आयुक्त जिंदल के खफा हुए बाबूलाल ने रातों-रात आयुक्त जिंदल को एपीओ करवा दिया तथा उनकी जगह छापर से शिकेश कांकरिया को लगवा दिया।

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इधर, इस मामले में पूर्व विधायक जोगेश्वर गर्ग ने संघ लॉबी का सपोर्ट लेते हुए चार दिन बाद ही इस ऑर्डर को कैंसिल करवाने में कामयाब हुए। इधर, आयुक्त जिदंल के दोबारा जालोर आयुक्त पद पर ज्वाईन करने पर बाबूलाल दोबारा खफा हो गया और उसने जैसे-तैसे कर आयुक्त जिंदल को इस कुर्सी पर नहीं बैठने देने के लिए शिकेश कांकरिया की ओर से हाईकोर्ट में स्टे के लिए रिट लगा दी। जिस पर कोर्ट ने गुरुवार को कांकरिया को स्टे दे दिया।

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भाजपाई आपस में लड़ रहे, जनता में हो रही किरकिरी.

भाजपाई आपस में लड़ रहे हैं। भंवरलाल माली के सभापति बनने से लेकर अब तक जालोर नगर परिषद में भाजपा पार्षदों के बीच हमेशा आपसी लड़ाई चलती रही। यहां तक कि भाजपा पार्षदों ने पार्टी के पदाधिकारियों से मिलकर सभापति को हटाने तक की मांग की थी। सभापति भंवरलाल एसीबी में ट्रेप होने के बाद भी स्टे लाकर दोबारा कुर्सी पर बैठ गए। इधर, शहर का विकास होना तो दूर कार्य तक नहीं हो रहे हैं। नगर परिषद में भ्रष्टाचार इतना चरम पर है कि किसी आम व्यक्ति के कार्य नहीं हो रहे हैं। अवैध पट्टे जारी करने की एक दुकान बनकर रह गई है। अब आयुक्त के मामले को लेकर भी आपसी लड़ाई शुरू हो गई है। जो शहरवासियों में ना केवल चर्च का विषय है बल्कि भाजपा की हंसी उड़ाई जा रही है।

सभापति भंवरलाल का सपोर्ट करने वाला विधायक पति बाबूलाल अब आमने-सामने

एक समय था जब विधायक का पति बाबूलाल सभापति भंवरलाल माली का पूरी तरह से सपोर्ट करता था। जब भंवरलाल एसीबी में ट्रेप हुआ तब विधायक अमृता मेघवाल व उसके पति बाबूलाल ने पार्टी के उच्च अधिकारियों से यह मांग की थी कि सभापति को गलत तरीके से फंसाया गया है। अब ऐसी स्थिति है कि बाबूलाल और भंवरलाल दोनों आमने-सामने है। दो दिन पहले जब आयुक्त जिंदल को एपीओ करवाया गया तो बाबूलाल ने भाजपा नगर मंडल के ग्रुप में भंवरलाल से जुड़ी विभिन्न खबरों को पोस्ट किया था।

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