भैया दूज पर इनका करें पूजन और इस मुहुर्त में लगाएं तिलक, पढ़ें इस खबर में…

दीपावली के दो दिन बाद भाई दूज आती है और इस दिन चित्रगुप्त की पूजा के साथ-साथ लेखनी, दवात तथा पुस्तकों की भी पूजा की जाती है। यमराज के आलेखक चित्रगुप्त की पूजा करते समय यह कहा जाता है-
लेखनी पट्टिकाहस्तं चित्रगुप्त नमाम्यहम्  

चित्रगुप्त की प्रार्थना के लिए मंत्र
मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्
लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्

भैया दूज का महत्व
वणिक वर्ग के लिए यह नवीन वर्ष का प्रारंभिक दिन कहलाता है। इस दिन नवीन बहियों पर ‘श्रीÓ लिखकर कार्य शुरू किया जाता है। कार्तिक शुक्ल की द्वितीया को चित्रगुप्त का पूजन लेखनी के रूप में किया जाता है। साथ ही इस दिन यदि बहन (चचेरी, ममेरी, फुफेरी कोई भी हो) अपने हाथ से भाई को खाना खिलाए तो उसकी उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन बहन के घर भोजन करने का महत्व है। इस दिन यमुनाजी के पूजन का भी विशेष विधान है। इस दिन श्री चित्रगुप्ताय नम: की 108 मंत्र का जाप करना लाभदायी रहता है।

इस मुहूर्त में लगाएं मंगल तिलक
1 नवंबर, 2016 मंगलवार को भैया दूज का मधुर पर्व मनाया जाता है। यह है मुहुर्त-
10.46 से 12.10 तक लाभ।

12.10 से 13.34 तक अमृत।
 
14 59 से 16.23 तक शुभ।
 
रात्रि में 19.23 से 20.59 तक लाभ।

इन समय में अपनी सुविधानुसार भाई को तिलक लगा सकते हैं।

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