डिप्टी के घर आबकारी विभाग की दबिश, भनक लगी तो आरोपी फरार

सांचौर @ अर्थ न्यूज नेटवर्क


आबकारी विभाग ने लम्बे समय बाद कार्रवाई करते हुए शहर के नट कॉलोनी में अवैध शराब के धंधे में लिप्त डिप्टी के घर में दबिश दी। हालांकि टीम ने यहां से 294 पव्वे अवैध शराब बरामद की, लेकिन कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी मौके से भाग छूटे। सनद रहे कि डिप्टी कोई पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि अवैध शराब के काम में लिप्ट नट जाति की महिला का नाम है।


दरअसल, आबकारी विभाग को सूचना मिल रही थी कि शहर के नट कॉलोनी में अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। जिस पर विभाग की टीम ने आबकारी थाना प्रभारी रूपसिंह के नेतृत्व में शुक्रवार शाम दो घरों में दबिश दी। कार्रवाई भनक लगने पर आरोपी महिला डिप्टी पत्नी स्व. खीमाराम नट व मदन पुत्र सरदारा नट मौके से भाग छूटे। लेकिन टीम ने यहां से 294 पव्वे शराब बरामद कर दोनों के खिलाफ आबकारी अधिनियम में मामला दर्ज कर कार्यवाही शुरू की।

कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति

जिले में लम्बे समय बाद आबकारी विभाग की कार्रवाई देखने को मिल रही है। लेकिन हकीकत यह है कि यह सिर्फ खानापूर्ति है। कहने को अब भी बड़ी तादाद में सांचौर के सरहदी इलाके से होते हुए शराब की तस्करी होती है, लेकिन आबकारी विभाग के नाम से ऐसी कोई उपलब्धि दर्ज नहीं है जिसमें उन्होंने कोई बड़ी खेप पकड़ी है। यह जरूर है कि मृतप्राय हो चुका विभाग कभी-कभार छोटी-मोटी कार्रवाई करके ढिंढोरा जरूर पिटता है।

जिले में धड़ल्ले से चल रहीं अवैध ब्रांच

कायदों के मुताबिक जिले में देसी व अंग्रेजी शराब की तकरीबन 140 अधिकृत दुकानें हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इनके अलावा करीब 250 ब्रांचों के आड़ में अवैध रूप से शराब की दुकानों का संचालन हो रहा है। इस तरह जिले में करीब 400 दुकानें संचालित हो रही है। दरअसल, यह पूरा खेल आबकारी विभाग की शह पर चलता है। जाहिर है इसमें विभागीय अधिकारियों को भी राजस्व लक्ष्य पूरा करने की आड़ में अच्छी खासी आमदनी होती है। यही वजह है कि विभागीय अधिकारी भी महज उन ब्रांच पर ही कार्रवाई करती है, जहां से उन्हें वसूली नहीं मिलती है। ऐसे में आबकारी कार्रवाई में बेबस बनी पुलिस भी मूकदर्शक बनकर इस पूरे खेल को मौन स्वीकृति देती है। ऐसा नहीं है कि यह मामला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के ध्यान में नहीं है, बल्कि सबकुछ जानते हुए भी यह काम बेरोकटोक चलता है। गत साल इस मुद्दे को आहोर विधायक शंकरङ्क्षसह राजपुरोहित भी जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक में उठा चुके हैं, लेकिन आबकारी अधिकारी इस पर राजस्व लक्ष्य का बहाना बनाकर पतली गली निकाल लेते हैं। यही वजह है कि बिना लाइसेंस के जिलेभर में धड़ल्ले से अवैध ब्रांच का खेल चल रहा है।

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