दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला-लम्बे सयम तक पति को रिलेशन से रोकना तलाक का आधार

अगर पत्नी लंबे समय तक पति को सेक्स से रोकती है तो वो तलाक ले सकता है, ऐसा दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे मानसिक क्रूरता बताया। इसको आधार मानते हुए पति द्वारा मांगे गए तलाक को भी मंजूरी दे दी। निचली अदालत ने पति की अर्जी को खारिज कर दिया था।

ऐसा है मामला

एक कपल की शादी 26 नवंबर 2001 को हुई थी। 2013 में पति ने ट्रायल कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई। हरियाणा के इस कपल के दो लडक़े हैं। तलाक की अर्जी दाखिल करते वक्त बच्चों की उम्र 10 और 9 साल थी।

यह था आरोप

न्यायालय में दाखिल अर्जी में शख्स ने पत्नी पर आरोप लगाया कि वो घर का काम नहीं करती। वहीं पत्नी का बर्ताव जब ज्यादा खराब हो गया तो इस शख्स के पैरेंट्स ने उसी घर में एक हिस्सा उन्हें रहने के लिए दे दिया। पति का आरोप है कि फिजिकली फिट होते हुए भी पत्नी ने उसे साढ़े चार साल तक फिजिकल रिलेशन से रोका। ट्रायल कोर्ट में पति के आरोपों को पत्नी ने शुरुआत में नकारते हुए तलाक देने से इनकार कर दिया। फिर वो कोर्ट में पेश ही नहीं हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला को पेश होने के नोटिस भी भेजे गए लेकिन वो नहीं आई।

यह दिया आदेश

हाईकोर्ट ने इस शख्स की तलाक की अपील स्वीकार कर ली। कहा- ट्रायल कोर्ट में भी महिला ने पति के आरोपों को खारिज नहीं किया था। पति ये साबित करने में कामयाब रहा है कि वो मानसिक क्रूरता का शिकार है। पत्नी लंबे वक्त तक उसे सेक्स से रोकती रही। जबकि ये लोग एक ही छत के नीचे रहते हैं। बेंच ने कहा कि महिला ने पति को सेक्स से तब रोका जबकि उसे कोई फिजिकल डिसीज भी नहीं थी। फैसले में कहा गया कि जीवनसाथी का सेक्स से इनकार करना मानसिक क्रूरता माना जाएगा।

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