सुपरवाइजर के भाई से परेशान है कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, विधायक तक पहुंच चुकी हैं शिकायतें…

जालोर. महिला एवं बाल विकास विभाग के आहोर ब्लॉक में कार्यरत एक महिला पर्यवेक्षक के भाई की धौंस किसी अधिकारी से कम नहीं है। यह महोदय अपने बहन की जगह आंगनबाड़ी केंद्रों का ना केवल निरीक्षण करने पहुंच जाते हैं, बल्कि केंद्र एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के फोटो भी लेते हैं। कई बार ये आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निलंबित करने की धमकी देेने से भी नहीं चूकते। इधर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मानें तो ये सारी हरकतें वह अपनी बहन के इशारे पर करता है। ताकि उसे कमीशन मिलता रहे। इस मामले में पूर्व में कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विधायक को भी लिखित शिकायत पेश कर चुकी हैं। बावजूद इनके व्यवहार में कोई फर्क नहीं आया।
दरअसल, महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक की ओर से नया सॉफ्टवेयर तैयार कर सुपरवाइजर्स को फिल्ड वर्क के दौरान प्रतिदिन कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों की तस्वीरें भेजने के आदेश दे रखे हैं। साथ ही नियमित निरीक्षण कर प्रति केंद्र पर 20 बच्चों के लक्ष्य तक पहुंचने के निर्देश दे रखे हैं। इसके तहत सुपरवाइजर की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया जाता है। लेकिन आहोर में कार्यरत सुपरवाइजर कृष्णा वर्मा की जगह कई बार उनके भाई शंकरलाल आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करने पहुंच जाते हैं। हालांकि शंकरलाल ने खुद विभाग में अपना वाहन लगा रखा है और चालक का काम करता है। ऐसे में वह वाहन से अपनी बहन को लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करवाता है। लेकिन कई बार वह अकेले ही केंद्रों तक पहुंच जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अगर सुपरवाइजर खुद निरीक्षण करें तो उन्हें कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन उनके भाई की ओर से बार-बार निरीक्षण कर हटाने की धमकी देना कतई उचित नहीं है।
आरोप यह भी…
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अर्थ न्यूज को बताया कि कई बार वाहन चालक शंकरलाल केंद्र का समय पूरा होने के बाद केंद्रों पर आता है और केंद्र के साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका को साथ खड़ाकर फोटो लेता है। विरोध करने पर उनको निलंबित करने की धमकी भी देता है।
फिर इन्हें रियायत क्यों
विभाग के निदेशक की यह पहल सराहनीय है कि उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का ठहराव सुनिश्चित करने एवं उनके कार्य में सुधर करने के लिए अभिनव पहल की है। इससे सुपरवाइजर के काम में भी सुधार हुआ है। पहले महीने-दो महीने में एक-दो बार केंद्र का निरीक्षण होता था, लेकिन अब प्रत्येक केंद्र पर सप्ताह में एक बार तो निरीक्षण हो ही जाता है। इसकी वजह सुपरवाइजर को हर रोज सुबह ही निरीक्षण वाले केंद्रों की सूचना भेजनी होती है। लेकिन इसकी आड़ में कई केंद्र ऐसे है जो अधिकांश समय बंद रहते हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान इन केंद्रों को खोलकर इतिश्री कर ली जाती है। इस मामले में सुपरवाइजर की ओर से शह देने का आरोप है।
चार माह से अटका बिल
आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वयं सहायता समूहों की ओर से भोजन बनाकर बच्चों को खिलाने के आदेश है, लेकिन हकीकत यह है स्वयं सहायता समूहों की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन पकाने में रुचि ही नहीं ली जाती है। ऐसे में अधिकांश स्वयं सहायता समूह महज औपचारिकता के लिए बनाकर इनका खर्च आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से वहन किया जाता है। इधर, आहोर ब्लॉक में बीते चार माह से पोषाहार के बिल तक नहीं बन पाए हैं। हालांकि विभागीय लेखाकार की मानें तो उन्हें पूरे ब्लॉक से बिल ही अब मिले हैं लिहाजा अब भुगतान कर दिया जाएगा। जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनसे समय पर बिल बनाने के लिए भी कमीशन मांगा जाता है।
बिल अब मिले हैं
पूरे ब्लॉक में किसी भी जगह के बिल नहीं बन पाए हैं। इसका कारण अब तक बिल नहीं मिलना था। अब बिल मिले हैं तो भुगतान करने पर काम कर रहे हैं।
– अशोक प्रजापत, लेखाकार, महिला एवं बाल विकास विभाग, आहोर
नहीं कर सकता निरीक्षण
अगर वाहन चालक निरीक्षण के दौरान सुपरवाइजर के साथ गया हो और फोटो के लिए बोलकर काम करवा ले तो अलग बात है। लेकिन वह अकेला निरीक्षण नहीं कर सकता। अगर ऐसी कोई शिकायत मिलती है तो कार्यवाही की जाएगी।
– सुरेश कुंटल, अतिरिक्त प्रभार, सीडीपीओ, आहोर

अधिकारियों को अवगत करवाएंगे
हां, यह सही है कि पूर्व में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दो बार सुपरवाइजर व उसके भाई पर परेशान करने की शिकायत की थी। इस बारे में उन्हें समझाया भी गया था। अगर अब भी ऐसा होता है तो अधिकारियों को अवगत करवाएंगे।
– शंकरसिंह राजपुरोहित, विधायक, आहोर

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